Maa Xxx Kahani - मां बेटे का नाजायज वाला प्यार - Incestsexstories.in | Hindi antarvasna sex kahani Maa Xxx Kahani - मां बेटे का नाजायज वाला प्यार - Incestsexstories.in | Hindi antarvasna sex kahani

Maa Xxx Kahani – मां बेटे का नाजायज वाला प्यार

Maa Xxx Kahani :> माँ Xxx कहानी में पढ़ें कि विधवा माँ ने कैसे अपनी वासना के अधीन होकर अपने बेटे से सेक्स करने की सोची. कैसे बना माँ बेटे का जिस्मानी रिश्ता? Maa Xxx Kahani

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम संगीता है. मैं आपको अपने बेटे निखिल के साथ अनायास होने वाली सेक्स कहानी में आपका स्वागत करती हूँ.
माँ Xxx कहानी के पिछले भाग
बेटे और उसकी गर्लफ्रेंड की चुदाई देखी
में अब तक आपने पढ़ा था कि निखिल ने मेरी चुत में लंड पेल दिया था.

अब आगे माँ Xxx कहानी:

इस कहानी को लड़की की आवाज में सुनकर मजा लें.


निखिल मेरे चूतड़ को पकड़ कर अब लंड अन्दर बाहर करने लगा. Maa Xxx Kahani

अहह … मैं सातवें आसमान में उड़ रही थी. आज मेरी चुत के सभी हिस्सों के अच्छे से इस्तेमाल हो रहा था. मैं झुक कर अपने बेटे की धक्के झेल रही थी.
निखिल तेज़ी से लंड चुत में दौड़ाने लगा था. सारी सर्दी छू-मंतर हो गई थी.

‘अहह ओह्ह उफ़्फ़ सीईईईई अहह ओह्ह ओह्ह आहहहह … ओह अहह उफ़्फ़ उफ्फ्फ ..’
कमरे में बस यहीं कामुक सिसकारियां गूंजने लगी थीं.

मेरा जवान बेटा आज एक मंजे हुए खिलाड़ी की तरह मुझसे खेल रहा था. उसके साथ मेरा खून का रिश्ता तो पहले से ही था मगर आज हमारे बीच एक जिस्मानी रिश्ता भी बन चुका था.

हमारे जिस्मों से ठंड एकदम से गायब हो गई थी. बस अब हम दोनों चुदायी की एक अनोखी दुनिया में खो चुके थे.
हम सब कुछ भूलकर एक दूसरे के शारीरिक भूख को मिटा रहे थे.

शायद मैंने या निखिल ने कभी ये नहीं सोचा होगा कि हमारे बीच की ममता और स्नेह वाले रिश्ते के अलावा कभी हम दोनों चुदाई वाला रिश्ता भी बनाएंगे.

घोड़े की तरह निखिल मेरी चुत में लंड काफी समय से दौड़ाए जा रहा था.

फिर थोड़ी देर बाद निखिल मुझे वहां पड़ी चारपाई में ले जाकर लिटा दिया और वो मेरे ऊपर छा गया.
मेरी दोनों टांगों को फैला कर मेरे छेद में अपना हथौड़ा डाल कर रगड़ने लगा. Maa Xxx Kahani

निखिल मुझे जोरदार किस करने लगा. ये भी मेरा उसके साथ पहला किस था. जब बचपन में मैं निखिल के छोटे होंठों को चूमती थी, तो मुझे बहुत ही खुशी मिलती थी. क्योंकि वो मेरे जिगर का टुकड़ा था.

आज भी उसके होंठों को जब मैं चूम रही थी, तो मुझे अपार आनन्द मिल रहा था. मगर उस आनन्द और आज के आनन्द में बहुत फर्क था.

आज वो मुझे अपनी महबूबा की तरह चूम रहा था. उसके शरीर से मेरा शरीर लिपट गया था और चुत में लंड का घर्षण चल रहा था.
मेरी चुत बार-बार पानी छोड़ रही थी, जिस कारण निखिल का लंड आसानी से मेरी चुत में फिसल रहा था.

मैं आनन्द से सराबोर होकर अपने अन्दर उठे वासना के तूफान के शांत होने की अवस्था में आ चुकी थी. मैं आती भी कैसे नहीं … मेरी चुत में लगातार 20 मिनट से जो प्रहार हो रहे थे.
वो भी बिना रुके!

मेरे बेटे ने मेरी चुत में लंड की धकापेल जो मचा रखी थी.
मेरा शरीर ऐंठने लगा था.

फिर कुछ ही देर बाद तेज़ झटकों ने मुझे बता दिया कि तुम तो अब गईं, मेरा शरीर हिल गया था.
मेरी चरमसीमा प्राप्त करना ही शायद मेरा आज का प्रारब्ध था.

निखिल भी मेरे पीछे-पीछे तेज़ धक्कों के साथ ही अपना परमानन्द को प्राप्त करने में लग गया था. Maa Xxx Kahani
उसने अपना सारा आनन्द मेरी चुत में ही उड़ेल दिया. हम दोनों एकदम शांत हो गए थे. बाहर हो रही बारिश भी ना जाने कब की शांत हो चुकी थी.

निखिल मुझसे अलग होकर कमरे से निकल गया और थोड़ी देर बाद ही उसकी आवाज आई- जल्दी चलो, बरसात बंद हो गयी है.
मैं- हां बस दो मिनट में आ रही हूँ.

मैं जल्दी से अपने कपड़े ठीक करके निकली.
निखिल गाड़ी पर बैठ कर मेरे आने का इंतज़ार कर रहा था.
मैं जाकर गाड़ी पर बैठ गयी और हम निकल गए.

पूरे रास्ते में हम दोनों एकदम खामोश थे. घर पहुंच कर दोनों अलग-अलग कमरे में चले गए.
मैं रात की सुनहरी यादों में खो कर सो गई थी.

हम एक दिन वहीं रुके, फिर काम निपटा कर अगली सुबह वापस निकल गए.
हमारे बीच उस रात वाली घटना के बारे में अभी तक कोई बात नहीं हुई थी. हम अपने शहर वाले घर में आ गए.

हम दोनों उस घटना को जैसे जानते ही नहीं हैं … वाला व्यवहार करने लगे थे.
मैं भी उस रात की घटना को महज ठंड से बचने के लिए किए उपाय समझ कर नार्मल जिंदगी बिताने लगी.

मगर मेरे अन्दर उमड़ रहे बादल मुझे परेशान कर रहे थे. Maa Xxx Kahani

दो दिन बाद रात में मुझे मन किया कि चल कर देखा जाए कि निखिल ने नेहा को फिर से बुलाया या नहीं.
मैंने कमरे में झांक कर देखा तो सच में निखिल और नेहा का रोमांस अपने चरम पर था. दोनों आपस में गुत्थमगुत्थी कर रहे थे.

सीन देख कर मेरे अन्दर की हवस तेज़ होने लगी.
ऐसे ही मैं 4 चार दिन देखती रही. आखिरकार मेरे सब्र का बांध टूटने लगा था.

पांचवें दिन हम दोनों रात में खाना खा रहे थे. मुझसे रहा नहीं गया.

मैं- बेटा ये नेहा कितने दिनों से रात में आती है.
निखिल ने घबरा कर कहा- क्या … नहीं तो वो कहां आती है.

मैं- घबराओ नहीं, मुझे सब पता है. वो रात में आती है और तुम दोनों क्या करते हो, ये मैं देख चुकी हूँ.
निखिल- वो हम दोनों प्यार करते हैं.

मैं- मुझे सब पता है. इस उम्र में लड़कों और लड़कियों को इस चीज़ की बहुत जरूरत होती है. मगर जवानी के जोश में ध्यान रखना, कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए. दुनिया में बदनामी न हो. ना तो तेरी … और ना नेहा की.
निखिल- ऐसा कुछ नहीं होगा मम्मी. वैसे भी हम बाहर ज्यादा बातें नहीं करते.

मैं- मैं एक बात बोलना चाहती हूँ. Maa Xxx Kahani
निखिल- क्या?

मैं- यही कि उस बारिश वाली रात हमारे बीच जो कुछ हुआ, वो केवल ठंड से बचने के लिए किए गए काम का हिस्सा था. मगर उस दिन से मेरे अन्दर एक अजीब सी चाहत दौड़ गयी है. पता नहीं मैं अपने शरीर को ठीक से संभाल नहीं पा रही हूँ. शायद जिंदगी भर अकेली रहने की आदत सी पड़ गयी थी. मगर एकाएक उस रात मेरी सो चुकी अरमानों में तूने एक नई किरण डाल दी है. मैं चाहती हूँ कि अभी कुछ दिन तुम नेहा को मत बुलाना.
निखिल- मैं समझा नहीं मम्मी.

मैं- बस तुम नेहा को रात में मत बुलाना … फिर मैं बाकी समझा दूंगी.
निखिल- ठीक है.

मैं- क्या वो आज आ रही है?
निखिल- नहीं, आज ही उसका पीरियड चालू हुआ है.
मैं- ठीक है, जाओ आराम करो.

निखिल अपने कमरे में चला गया.

मुझे आज सेक्स करने का बहुत मन था. मैंने जल्दी से काम समाप्त किया और कुछ देर अपने कमरे में आराम करने लगी.

कुछ देर के बाद जब मेरी वासना बर्दाश्त से बाहर हुई तो उठ कर सीधी निखिल के कमरे में चली गयी.
वहां निखिल सो रहा था. मैं भी उसके साथ उसके बाजू में जाकर लेट गई.

निखिल जान चुका था कि मैं उसके साथ सो गयी हूँ. Maa Xxx Kahani

मैं धीरे-धीरे निखिल से चिपक कर सोने लगी. मेरे मन में संदेह था कि पता नहीं आज निखिल मुझ में कोई इंटरेस्ट लेगा या नहीं.

मगर मेरा सोचना गलत था.

निखिल पलट गया और मेरी तरफ चेहरा करके मेरे चेहरे को देखने लगा था. मैं भी उसे देख रही थी. हम दोनों की नज़र एक दूसरे को देख रही थीं.

तभी निखिल मेरे होंठों की तरफ बढ़ गया और मेरे होंठों को चूमने लगा.
मैं भी निखिल का बखूबी साथ दे रही थी.

हम दोनों शांत थे. मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए और जोर से किस करने लगी. मेरे अन्दर की आग भड़क रही थी.
निखिल का तो अभी गर्म खून था ही … वो जोश से भरा हुआ था.

मैं आज फिर एक बार अपने ही बेटे के होंठों को चूम रही थी. वो मुझसे लिपट गया था. मेरे दोनों स्तन उसके सीने से दब गए थे.

निखिल ने बड़ी तेजी से मेरे ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्लाउज निकाल दिया. अगले ही पल मेरे स्तन उसके हाथों में आ चुके थे.

मेरी बड़ी-बड़ी मखमली दूधिया सुडौल चूचियों को सहलाने से मुझे जो मज़ा मिल रहा था, वो और कहीं नहीं मिल सकता था.

निखिल मेरे स्तनों को चूसने लगा. Maa Xxx Kahani
मुझे एक बार फिर निखिल का बचपन याद आ गया था कि कैसे इन्हीं स्तनों से मैं इसकी भूख शांत करती थी.
आज भी वो मेरे इन्हीं स्तनों को चूस रहा था. मगर आज वो मेरी भूख शांत कर रहा था.
उस समय उसका पेट की भूख शांत होती थी और आज ये मेरे जिस्म की भूख शांत कर रहा था.

मगर ये वासना की भूख थी.

मेरे स्तनों को चूसे जाने से मेरे अन्दर काफी तेज उत्तेजना दौड़ने लगी थी.
मैं निखिल के होंठों को दोबारा चूमने लगी और उसके गाल, गर्दन, पीठ, नाभि सभी जगह बारी-बारी चुम्बनों की बौछार करने लगी.

धीरे-धीरे वो भी अब मेरे साथ सब कुछ करने को जैसे तैयार हो चुका था.

निखिल ने अपने हाथों से मेरी साड़ी और पेटीकोट को कमर तक उठा दिया था और हाथों से मेरी चुत को स्पर्श करने लगा था.
उसकी इस हरकत से मैं एकदम कांप उठी. मेरी चुत में उसके हाथों का स्पर्श होते ही मेरे अन्दर भी एक अजीब सी कंपकंपी आने लगी थी.

निखिल के हाथ को पकड़ कर मैं अपनी चुत में दबाने लगी थी.
मैंने भी अपना पूरा जोर लगा दिया था और चुत को रगड़वाने लगी थी.

निखिल के चुत रगड़ने से मेरी सिसकारियां निकल पड़ी थीं.
वो अब मेरी चुत को और जोर-जोर से सहलाने लगा था. Maa Xxx Kahani

मैं बहुत देर तक ऐसे ही चुत को रगड़वाने से गर्मा गई थी.
बीच-बीच में मेरी चुत पानी छोड़ने लगी थी. मैं साड़ी और पेटीकोट की बंधन से आजाद होना चाहती थी इसलिए मैंने दोनों को नीचे खिसका दिया.

मेरी नंगी चुत देखकर निखिल ललचा गया था.
निखिल धीरे से अपना चेहरा मेरी चुत के पास ले गया और मेरी चुत को चूसने लगा.

अहह … मेरे शरीर में एक करंट की लहर सी दौड़ गयी.
निखिल जोर-जोर से अपनी जीभ चुत में घुमा रहा था.

मैं अब पूरी तरह मूड में आ चुकी थी. मैं लेट कर आंखें बंद करके मादक सिस्कारियां ले रही थी.

निखिल का लंड भी अब मेरी चुत में सैर करने को आतुर हो चुका था.
मगर मैं निखिल के मोटा लंबा लंड का स्वाद चखना चाहती थी.

मैंने निखिल के सारे कपड़े उतार कर उसे पूरा नंगा कर दिया. निखिल का लंड पूरी तरह अपने 7 इंची रूप में आ गया था.

मैंने घुटनों के बल बैठ कर निखिल के लंड को पकड़ कर धीरे से अपने मुँह में ले लिया. Maa Xxx Kahani
आह लंड चूसने का गजब का आनन्द था. निखिल का लंड मेरे मुँह में आधा भी नहीं समा पा रहा था.
मैंने निखिल के लंड को जीभर के चूसा.

फिर मैं बिस्तर में लेट गयी; मेरी जांघों को फैला दिया.

फिर उसने मेरी टांगों को अपने कंधे पर ले लीं और खुद मेरी टांगों के बीच में आ गया.
मेरे बेटे ने अपना लंड मेरी चुत में फिट किया और अन्दर पेल दिया.
उसका लंड एक ही झटके में मेरी चुत की गहराई में समा गया.

लंड चुत में समाते ही मेरे और निखिल के बीच एक बार फिर नाजायज संबंध बन चुका था. ऐसा संबंध जो बहुत बड़ा पाप था. बिना कोई जोर लगाए मेरे बेटे का मोटा लंड पूरी तरह मेरी चुत में डूब गया था.

निखिल मेरे नंगे जिस्म को चूमते हुए अपना लंड चुत में दौड़ाने लगा.

अहह गजब का मदहोश करने वाला पल था. कल तक जिस बेटे के बारे में गलत नहीं सोच पा रही थी, आज मैं उसके साथ शारीरिक संबंध बना रही थी.
इस उम्र में ऐसा भारी लंड शायद ही किसी लड़के का होता होगा.

निखिल के हर एक झटके का मैं अपनी चुत में खूब मज़े लेने लगी थी. मैं बिस्तर में लेटी हुई थी और मेरी चुत में मेरे बेटे के लंड के धक्कों को बौछार हो रही थी. Maa Xxx Kahani

मेरा बेटा अपना लंड मेरी चुत में काफी तेजी से रगड़ रहा था. मेरी चुत के पानी से निखिल का लंड पूरी तरह भीग गया था और आराम से चुत में दौड़ रहा था. मैं निखिल को बार-बार उसके होंठों और गर्दन को चूमते हुए धक्के लगवा रही थी.

मैं सब कुछ भूल चुकी थी. मैं जिसके साथ मज़े कर रही थी, वो मेरा सगा बेटा था और शायद वो भी भूल गया था कि वो अपने मम्मी के साथ संभोग कर रहा है.

बीच-बीच में मेरी चुत पानी छोड़ रही थी. मैं अपने बेटे निखिल के मोटे लंड से करीब 20 मिनट से लगातार चुद रही थी.

आखिरकार निखिल के पानी छोड़ने का टाइम आ गया. उसने अपना वेग दोगुना कर दिया और मुझे कसके जकड़ लिया.

जब उसका पानी निकला, तो पूरा लंड उसने मेरी चुत के अन्दर ही रोक दिया था. उसके गर्म लावा के निकलने का पूरा आभास मेरी चुत की गहरई में हो रहा था.
जब निखिल पूरी तरह से झड़ गया, तो वैसे ही लंड को चुत में डाल कर मेरे ऊपर ही कुछ देर तक पड़ा रहा.

मैं जोर-जोर से हांफ रही थी.

कुछ देर बाद निखिल मुझसे से अलग हो कर मेरे बाजू में लेट गया.
मेरे शरीर में अब एक संतुष्टि थी. मेरी आंखों में एक चमक थी … मैं बहुत खुश थी. निखिल मेरे माथे को चूमने लगा.

मैं भी निखिल के होंठों को चूम कर बिस्तर से उठने लगी. Maa Xxx Kahani

निखिल ने मुझे अपनी तरफ खींच कर बिस्तर में ही रोक लिया था.
वो मेरे मम्मों में प्यार से हाथ फेरने लगा था.

निखिल की हरकतों से मेरे अन्दर दोबारा जोश भरने लगा था और कुछ देर बाद हम दोबारा चुदाई करने को तैयार हो चुके थे.

इस बार मैं उसके ऊपर आकर मेरी चुत लंड में फंसा कर चुदायी करने लगी.

अभी तक हम दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई थी. जो भी हो रहा था … बड़ी खामोशी से दोबारा होने लगा था.

हमारा दूसरा राउंड थोड़ा लम्बा चला था. इस बार फिर से उसने सारा पानी अन्दर ही गिरा दिया था.
ये रात बहुत ही सुहानी गुजरी थी.

हम दोनों मां बेटे ने एक ही कमरे में रात बिता दी थी.
सुबह मैं जल्दी उठी, जब मैं जगी, तब निखिल सो रहा था.

बाकी दिनों की तरह ही दिन बीतने लगे थे. मगर अब हमारी रातें रंगीन होने लगी थीं.

करीब 7 महीने हमारे बीच संबंध बनते रहे. उसके बाद शायद मेरी शरीर से वो सुनहरा दौर गुजर गया.

अब 15-20 दिन में एकाध बार चुदाई हो जाया करती थी. Maa Xxx Kahani
धीरे धीरे मेरी रुचि भी इन सबसे हट चुकी थी.

निखिल की शादी नेहा से हो गई थी. अब वो दोनों बड़े प्यार से अपना दाम्पत्य जीवन जी रहे थे.

मेरे और निखिल के बीच में जो कुछ भी हुआ, वो हम दोनों के अलावा किसी और को पता नहीं … मगर मेरे बेटे ने मुझे वो दिया, जिसे कोई भी बेटा अपनी मां को नहीं दे पाता.

मैंने अपने बेटे से शरीरिक संबंध बनाया, इसका कोई दुख नहीं है बल्कि मुझे अपने आगे का रास्ता मिल चुका था.

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