Hot Office Xxx Kahani - सहकर्मी भाभी को दिया चुदाई का सुख - Incestsexstories.in | Hindi antarvasna sex kahani Hot Office Xxx Kahani - सहकर्मी भाभी को दिया चुदाई का सुख - Incestsexstories.in | Hindi antarvasna sex kahani

Hot Office Xxx Kahani – सहकर्मी भाभी को दिया चुदाई का सुख

हॉट ऑफिस Xxx कहानी मेरी कंपनी में काम करने वाली एक सेक्सी भाभी की है. उसपर मेरा दिल आ गया। मैंने उससे दोस्ती करके अपने मन की इच्छा कैसे पूरी की?

दोस्तो, मैं राहुल …
मेरी पिछली कहानी चार साल पहले आयी थी
अनजान भाभी को पटा कर उसके घर जाकर चूत की चुदाई की

काफी समय के बाद एक बार फिर से आपके लिए एक कहानी लेकर आया हूं। ये हॉट ऑफिस Xxx कहानी पढ़कर आपको मजा आने वाला है इसलिए लंड थामकर बैठ जाइये।

आपको बता दूं कि मेरी उम्र 30 साल है और मेरा लंड काफी लंबा और तगड़ा है। मुझे हमेशा ही चुदाई करने की आग लगी रहती है। भाभियों का गदराया जिस्म, उनके हिलते हुए मोटे चूचे और भारी भरकम मटकती गांड मेरी कमजोरी है।

इस कहानी की नायिका भी एक ऐसी ही कामुक नशीली भाभी है जिसकी गोरी गांड ने मुझे पागल कर दिया था।

भाभी का नाम स्नेहा था और वो देखने में इतनी सेक्सी थी कि उसको देखते ही मुंह से उफ्फ … ही निकले।
वह 34 साल की थी और मदमस्त जवानी से भरपूर रसीला माल थी।

अब मैं आपको बताता हूं कि भाभी के साथ मैंने कब और कैसे मौज ली।

दरअसल मैं कुछ टाइम पहले एक कंपनी में जॉब करने लगा था।
वहां पर और भी बहुत सारी लड़कियां काम करती थीं मगर मेरी नजर केवल भाभियों पर जाकर ही रुकती थी।

उन्हीं भाभियों में से एक थी स्नेहा भाभी।
मैंने उनको चोदने की ठान ली थी।

धीरे धीरे मैंने उसके बारे में पता किया। उसका एक बेटा था और पति किसी कंपनी में काम करता था।
हमारी कंपनी में तीनों ही शिफ्ट में काम चलता था।

भाभी से दोस्ती होने के बाद वो भी मुझसे हंसकर बातें किया करती थी। मैं उसकी मोटी गांड को देखा करता था। धीरे धीरे उसको भी पता लगने लगा कि मैं कहां देखता रहता हूं।
औरतों को मर्दों की नजरें जल्दी पकड़ में आ जाती हैं।

कई बार जब वो साड़ी डाल कर आती तो पेट, कूल्हे, कमर और ब्लाउज में से चूचियों की घाटी दिखती थी।
ये देखकर ही लंड बगावत पर उतर आता था।

ऐसे ही एक दिन मैं भाभी के पास खड़ा था और उनसे फाइल का काम करवा रहा था। मेरी नजर भाभी के चूचों पर ही थी।

अचानक स्नेहा ने मुझे देखते हुए पकड़ लिया और आँखों से गुस्सा दिखाया।
मैं डर गया कि कहीं उन्होंने बता दिया तो मेरी तो इज़्ज़त की ऐसी तैसी हो जानी थी।

मगर उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया और फिर काम करते हुए सब ठीक रहा।

अब स्नेहा भाभी मुझसे कुछ ज्यादा ही सेक्सी अंदाज़ में बातें करती और अपनी सेक्सी अदाएं मुझे दिखाती।
मैं भी कोई मौका न जाने देता उसके खूबसूरत बदन को देखने का।

जब वो दूसरी लड़कियों या लेडीज से बातें करते हुए मुझे देखती तो मेरा लंड खड़ा हो जाता था।
मैंने तो सोच लिया था कि अब तो मुझे ही बात करनी होगी।

एक दिन हम दोनों साथ में चाय पी रहे थे तो मैंने उनकी जांघ पर उंगली फेर दी।
मेरी उंगली उनकी पैंटी तक जाकर टकरा गई थी।
भाभी सिहर सी गयी।

उसने इधर उधर देख कर मुझे मना किया- क्या कर रहे हो राहुल … कण्ट्रोल करो!
मैंने धीरे से कहा- आप जैसी हॉट भाभी के साथ कण्ट्रोल हो ही नहीं सकता।

फिर वो उठ कर गांड हिलाती हुई चली गयी और मुझे मुड़कर स्माइल देती हुई गयी।

अगले दिन मैंने उनको पीछे से आकर रूम में पकड़ लिया और धीरे से कान में कहा- भाभी मैं आपका दीवाना हो गया हूं; मेरा पागलपन दूर कर दो।

ये कहते हुए मैंने भाभी की गांड पर लंड को दबा दिया।
कसम से मज़ा आ गया।
पहली बार मस्त मोटी गांड पर ऐसे लंड लगाकर मैं तो पागल ही हो गया था।

वो मुझसे अलग हो गयी और बोली- पागल हो गये हो क्या … किसी ने ऐसे करते हुए देख लिया तो?

उसके बाद अन्य स्टाफ आ गया।
मैं वहां से चला गया।

कई बार हमारी नज़रें मिलीं और मैंने आँखों से मिलने करने का इशारा दिया।
वो मुझे मना करती रही और तड़पाती रही।

एक दिन मैंने उनको किसी स्टाफ से अपने पति के बारे में कहते हुए सुना कि उनका पति दारू पीता है और बेड पर साथ नहीं देता है।

फिर कुछ देर बाद स्टाफ के जाने के बाद मैं उनके पास गया और कहा कि मुझे उनकी लाइफ के बारे में सब पता चल गया कि वो कितनी दुखी है।

ये कहकर मैंने भाभी का हाथ पकड़ लिया।
मैंने उनके हाथ को प्यार से चूम लिया।

वो मेरी ओर असमंजस भरी नजर से देख रही थी।

फिर मैंने कहा- भाभी हम दोनों की पेरशानी एक है। आपके पास प्यार करने वाला नहीं है और मेरे पास आप नहीं हो, दोनों मिलकर एक दूसरे की प्यास बुझा देते हैं।

स्नेहा भाभी की आंखें नम सी हो गयीं।
मैंने उनके गाल को सहला दिया।

फिर किसी के कदमों की आहट हुई तो मैं वहां से चला आया।
उसके बाद भाभी मेरे से प्यार से बात करने लगी।

अब सावन का महीना आ गया था, बारिश का मौसम शुरू हो गया था।
उसी वक्त उनके पति किसी काम से बॉस के साथ चले गए थे।
उनका बेटा किसी रिश्तेदार के यहां चला गया था।

ऐसे मौसम में भाभी को चोदने की आग मेरे मन में तेजी से भड़कने लगी।
मैं दिन में कई बार उनको देखकर सेक्सी इशारे करता और उनको बताता कि मैं उनकी चूत के मिलन के लिए कैसे तड़प रहा हूं।

स्नेहा की आँखों में भी तड़प और प्यास साफ़ साफ़ झलकती दिख रही थी मगर वो ना में सिर हिला देती थी।
एक दिन मैंने स्नेहा भाभी को पकड़ लिया और उनके चूचे दबा दिए और गर्दन पर किस करते हुए उसको गर्म कर दिया।

ये सब कुछ ही पल के लिए हो पाया मगर मजा आ गया।
उसके बाद वो वहां से भाग गई।

उस दिन शाम को बारिश होने लगी। स्नेहा भाभी की आँखों में प्यास थी और वासना भी जिसको मैंने अपनी तरफ से भड़का रखा था।

अगले रोज रात वाली शिफ्ट थी। स्नेहा बहुत ही सेक्सी बन कर आई थी।
ब्लाउज की पतली डोरी से उनके चूचे बंधे थे। कमर और पेट साफ साफ दमक रहा था। शायद ब्रा भी नहीं पहनी थी इसलिए चूचे बार बार हिलते दिख रहे थे।

सारी रात मैं स्नेहा को आंखों ही आंखों में चूमता और चोदता रहा।

उसने भी मुझे बहुत तड़पाया। कभी बाल खोलकर बैठ जाती तो कभी बालों को हटाकर पीठ दिखाने लग जाती।

सुबह जाते जाते वो मुझे इशारा तो दे गयी कि आज की रात क़यामत की रात हो सकती है।
मैंने देखा कि आज रात स्नेहा की ड्यूटी नहीं लगी हुई थी।
इसलिए मैंने भी झट से प्लान कर लिया और उस दिन की छुट्टी ले ली।

मैं रात में घर से जॉब के लिए ही निकला लेकिन घरवालों को बिना बताये कि मैंने छुट्टी ले रखी है।

तो मैं सीधा स्नेहा के घर आ गया।
दरवाजे की घण्टी बजायी तो स्नेहा ने दरवाजा खोला।

मुझे पता था कि उसका पति घर में नहीं है तो मैं जल्दी से अंदर आ गया।
फिर जैसे ही वो गेट बंद करके वापस आई तो मैंने उसको बांहों में जकड़ लिया।

स्नेहा भाभी सिर्फ नाइटी में थी।
वो बोली- अरे रुको तो … ऐसा क्या उतावलापन है?
मैं बोला- बहुत रोक लिया भाभी, अब और नहीं रुक सकता।

मैं उनके मोटे चूचों पर पागलों की तरह टूट पड़ा। उन पर बेसब्री से मुंह मारता रहा।
उफ्फ … कितने नर्म-मोटे चूचे थे।
मैं गांड को दबाते हुए चूचों को चूस रहा था।

वो बोली- राहुल अंदर चलो ना … उफ्फ … काटो मत।

हम दोनों बेडरूम में गये और जाते ही मैंने उसको फिर से दबोच लिया।
उसके बदन को सहलाते हुए उसकी गांड को दबाने लगा। उसको चूचों को कपड़ों के ऊपर से पीने लगा।

जल्दी से मैंने उसकी नाइटी उतरवा दी और उसको नंगी कर दिया।
नंगी भाभी मेरे सामने थी।

मैंने इस दिन का बहुत ज्यादा इंतजार किया था, मैं एक पल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था।

मैंने भी जल्दी से उनके कपड़े निकाल फेंके और खुद भी पूरा नंगा हो गया।

भाभी को मैंने बेड पर लिटा दिया और उसकी नंगी गांड पर हाथ फेरते हुए उसके होंठों को पीने लगा।

वो भी मेरा साथ देने लगी।

हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे।
अब मैंने नीचे का रुख किया उसके चूचों को पीने लगा।
मेरा एक हाथ उसकी गांड पर ही चल रहा था।

बीच बीच में मैं भाभी की गांड के छेद तक उंगली ले जाता था और वो मेरे हाथ को फिर पीछे हटा देती थी।

उसके चूचे चूसते हुए मैं उसकी निप्पलों को काट रहा था।
उसकी कामुक सिसकारियां कमरे में मादक माहौल बना रही थीं।

अब मेरा हाथ भाभी की चूत पर पहुंच गया था। मेरा लंड टनटना गया था।

भाभी की चूत से गीलापन मुझे अपनी उंगलियों पर लग रहा था। इससे मेरी प्यास और ज्यादा बढ़ गयी थी।
मैंने भाभी की चूत में उंगली दे दी और वो आह्ह … के साथ सिसकार उठी।

मैं भाभी की चूत को उंगली से कुरेदने लगा। उसकी नर्म गीली और गर्म चूत में उंगली देते हुए मेरे लंड में जोर के झटके लग रहे थे। भाभी की चूत को जैसे फाड़ देने का मन कर रहा था।

फिर मैंने उसको नीचे पटका और उसकी टांगों को खोलकर उसकी चूत में जीभ लगा दी।
वो एकदम से तड़प गयी।

मेरे सिर को पीछे हटाने लगी लेकिन मैंने जोर लगाकर उसकी चूत में जीभ दे दी।

उसको इतना मजा आया कि वो खुद ही मेरे सिर को चूत में दबाने लगी।
मैंने उसकी चूत में अंदर तक जीभ चलाते हुए चोदना शुरू किया।
वो सिसकारती रही और चोदने के लिए मिन्नतें करने लगी।

मैं भी चुदाई के लिए ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता था। मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और टोपे पर मल दिया।

टोपे को चिकना कर मैंने भाभी की क्लीन शेव चूत पर रखा।
एक दो बार मैंने टोपे को भाभी की चिकनी चूत पर रखा और आगे पीछे फिराया।
अब मेरे लंड का टोपा पूरा गीला और चिकना हो गया था।

मैंने भाभी के बदन पर लेटते हुए लंड को धकेल दिया और उसकी चूत में लंड को घुसा दिया।
मेरा लंड चूत में जाते ही भाभी ने मुझे बांहों में भींच लिया और मेरी कमर पर नाखून गड़ाने लगी।
मैंने गांड हिलाते हुए भाभी की चूत को चोदना शुरू कर दिया।

हम दोनों ही चुदाई के नशे में चूर हो गये। मेरा स्पीड लगातार बढ़ती जा रही थी और भाभी की सिसकारियां भी ऐसे ही बढ़ रही थीं।
फिर मैंने जोर जोर से भाभी के चूचे दबाने शुरू कर दिए और चोदता रहा।

बहुत मजा आ रहा था। भाभी की चूत बहुत गर्म थी।
चोदते हुए 10 मिनट होने वाले थे कि भाभी मुझे अपने ऊपर खींचने लगी। उसने मेरी गांड पर टांगों को लपेट लिया और मेरी गर्दन को काटते हुए चूसने लगी।

मैं जान गया कि भाभी की चरम सीमा नजदीक है।
मैंने पूरा जोर लगाकर भाभी की चूत में लंड को ठोकना शुरू कर दिया।

इस क्रिया में मेरी भी चरम सीमा आ गई।
फिर एकदम से मेरे लंड से वीर्य का वेग निकलने लगा।

इधर भाभी की चूत ने भी एकदम से ढेर सारा पानी छोड़ना शुरू कर दिया।
हम दोनों एक साथ झड़ने लगे और परम सुख को पा गए।

भाभी मुझसे लिपट गई और तेजी से सांसें लेने लगी। हम दोनों के बदन पसीने से भीग गये थे।

कुछ देर तक हम लिपटे रहे और फिर वो अलग हो गयी।

उसके बाद वो उठकर बाथरूम में चली गयी।
मैंने कहा- भाभी कपड़े मत पहनना; नंगी ही रहना।
वो मुस्कराकर मुझे देखने लगी।

फिर तब तक मैं उसके रूम में देखने लगा।
मुझे वहां पर दारू मिल गयी और मैंने दो पैग लगा लिए।

उसने मुझे देखा तो बोली- राहुल, तुम भी लेते हो क्या?
मैंने कहा- हां। आज तो जरूर लूंगा क्योंकि चुदाई का असली मजा नशे के साथ करने में है।

तीसरा पैग लेकर मैं स्नेहा भाभी के पास आ गया। मैंने उसकी गांड को दबाना और चूचों को चुभलाना शुरू कर दिया।
उसने मेरे लंड को हाथ से सहलाना शुरू कर दिया।

थोड़ी ही देर की चूमा-चाटी के बाद एक बार फिर से हम दोनों गर्म हो गए और फिर से चुदाई का खेल शुरू हो गया।
मैंने एक बार फिर से भाभी की चूत बजाई।
अबकी बार दारू के नशे में 30 मिनट की चुदाई का राउंड चला।

तभी बारिश भी होने लगी। बाहर आसमान से पानी की बारिश होती रही और अंदर हम अपने लंड और चूत के पानी की बारिश एक दूसरे के ऊपर करते रहे।

स्नेहा भाभी की लाइफ में इसी सुख की कमी थी और मैं उसे पूरा करने में लगा हुआ था।
सुबह तक मैंने भाभी को नंगी करके अपने से चिपका कर रखा।

सुबह मेरा लंड एक बार फिर से खड़ा हो गया। उठने से पहले मैंने उसकी चूत में फिर से लंड दे दिया और चोदने लगा।
चुदाई के बाद फिर से उसकी चूत में वीर्य की पिचकारी भर दी।

वो उठकर जाने लगी तो मैं उसकी नंगी गांड को देख रहा था।
वो बोली- ये नहीं मिलने वाली तुम्हें! इसका ख्वाब मत देखना।
उसके बाद मैं लेट गया और मुझे नींद आ गयी।

फिर जब मैं उठा तो मैं नहा लिया।
वो मेरे लिये किचन में नाश्ता बनाने लगी।

वो नंगी थी और मैं भी नंगा था।
दूर खड़ी नंगी औरत को ऐसे किचन में काम करते देख मेरी वासना फिर से जाग गई।

मैंने उसके पीछे से जाकर उसे झुकाया और अपना खड़ा लंड उसकी चूत में पेलकर चोदने लगा।
मैंने भाभी को वहीं खड़ी खड़ी चोद दिया।

वो भी खुश हो गयी। ऐसे अलग अलग पोज में चुदाई का मजा उसने कभी नहीं लिया था।

दिनभर हम नंगे पड़े रहे।
रात को भी मैंने उसको जैसे मन किया वैसे चोदा।

उस रात फिर मैंने भाभी की गांड भी चोदी। इस तरह से भाभी की चूत और गांड चुदाई का मैंने पूरा मजा लिया।

फिर जॉब पर भी कई बार मैं मौका पाकर चूमा-चाटी कर लेता था। अब जब कभी भी मौका मिलता है तो घर पर बुलाकर मैं उसे नंगी करके चोद देता हूं।

दोस्तो, आपको भाभी की चुदाई की ये हॉट ऑफिस Xxx कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताना। आप सब की प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा।
कहानी पर कमेंट्स में अपने विचार जरूर लिखें।
मेरा ईमेल आईडी है [email protected]

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