Hindi Vasna Kahani - बेटे और उसकी गर्लफ्रेंड की चुदाई देखी तो - Incestsexstories.in | Hindi antarvasna sex kahani Hindi Vasna Kahani - बेटे और उसकी गर्लफ्रेंड की चुदाई देखी तो - Incestsexstories.in | Hindi antarvasna sex kahani

Hindi Vasna Kahani – बेटे और उसकी गर्लफ्रेंड की चुदाई देखी तो

Hindi Vasna Kahani :> हिंदी वासना कहानी में पढ़ें कि जब एक विधवा माँ ने अपने बेटे को उसकी गर्लफ्रेंड की चुदाई करते देखा तो उसे कैसा महसूस हुआ. उसके मन में भी वासना जाग गयी. Hindi Vasna Kahani 

मेरा नाम संगीता है और मेरी उम्र अभी 45 साल है. मगर मैं ये जो हिंदी वासना कहानी बताने जा रही हूँ … वो पुरानी है.

जब मेरी शादी अशोक से हुई थी, मैं 19 साल की थी. शादी के एक साल बाद ही हमारा एक बेटा निखिल हुआ.

हमारी ज़िंदगी अच्छे से चल रही थी कि अचानक ही शादी के 3 साल बाद ही अशोक की एक एक्सीडेंट में मौत हो गई थी.

मैं महज 22 साल की उम्र में ही विधवा हो चुकी थी. मेरे जिंदगी में मेरे अलावा मेरे बेटे निखिल के सिवाए कोई नहीं था.
मेरी दुनिया में कोई रह गया था, तो वो निखिल था.

समाज और घर वाले मुझे दूसरी शादी करने के लिए बहुत फ़ोर्स करने लगे.
मगर मैंने ठान लिया था कि अब मैं दोबारा शादी नहीं करूंगी. मैंने अपने बेटे के सहारे जिन्दगी ऐसे ही गुजार दूंगी.

बस मैं अपने बेटे साथ जिंदगी व्यतीत करने लगी.

यह कहानी सुनें. Hindi Vasna Kahani


मैं गांव में रहती थी. समय के साथ मेरे शरीर में अब हलचल होनी शुरू हो चुकी थी. मेरे अन्दर सेक्स की एक लपट उठनी शुरू हो गयी.
मैंने अपने दिल को हजारों बार समझाया मगर ये जवानी बहुत ही तकलीफ देने वाली होती है.

एक दिन अचानक ही बाजार में ललित मिल गया.
ललित मेरे गांव का एक लड़का था. शादी से पहले मेरा अफेयर ललित के साथ ही था. ललित एक ऐसा लड़का था … जो मेरे पति से पहले मेरे साथ अनगिनत बार शारिरिक संबंध बना चुका था. Hindi Vasna Kahani

मैं शादी भी इसी से करना चाहती थी मगर घरवालों को ये बात पसन्द नहीं आई और मेरी शादी अशोक से करा दी गई थी.

अब तक मैं ललित को भूल चुकी थी मगर आज उसे देख मुझे उसके साथ गुजारा हुआ हर लम्हा याद आ गया.

ललित मुझे देख अचंभित था कि महज तीन साल पहले शादी हुई थी और अब ये विधवा हो चुकी है.
बड़ी झिझक से उसने मुझसे बात की.

मैं भी उससे बातें करने लगी. मैंने उसे अपनी पूरी कहानी बता दी.

उस दिन तो हम वहां से अलग हो गए मगर ललित को देख कर मेरे अन्दर अजीब से लहरें उठनी शुरू हो गई थीं.

मैंने अपने आपको बहुत रोका कि जो पहले हुआ, वो अब ठीक नहीं है. क्योंकि अब मैं एक बच्चे का मां जो थी.

एक के बाद एक 3-4 बार हमारी मुलाकात हो चुकी थी मगर अभी तक सब कुछ सिर्फ बातों तक सीमित था.

शारीरिक जरूरतों के चलते मैं अपने आपको ज्यादा दिन रोक नहीं पायी और एक दोनों के मर्जी से फिर से संबंध बन गए.

मेरे अन्दर एक साल से घुमड़ रहे बादल उस दिन जम के बरस गए थे. मेरा एक एक अंग ललित की फुहारों से तरबतर होकर झूम गया था.

एक बार फिर से ललित से सम्बन्ध बने, तो बस फिर क्या था. उस दिन के बाद से ललित और मेरे मिलने की सिलसिला शुरू हो गया.

करीब 4 साल बीत गए हमें पता ही नहीं चला कि हम दोनों किस दरिया में बहे जा रहे थे. हम कहीं न कहीं किसी भी हालत में इन 4 सालों में हर एक दिन मिलते और अपनी कामवासना को शांत कर लेते थे. Hindi Vasna Kahani

मगर ऐसा नाजायज संबंध ज्यादा दिन नहीं छुपता.
धीरे-धीरे हमारी बातें गांव में फैल गईं और सभी जान गए कि मेरे और ललित के बीच में क्या संबंध हैं.

ये बात मेरे घरवालों तक पहुंची, तो सब मुझे जैसे काट खाने को आतुर हो गए थे. तरह-तरह के ताने मारने लगे.
मैं थक कर गांव छोड़ कर शहर चली गयी. वहां मुझे अपना पेट पालना था. साथ में मेरे बेटे का भी अच्छे से पालन पोषण करना था.

मैं पढ़ी लिखी थी, तो मुझे एक कंपनी में काम मिल गया. मैं वहां काम करने लगी … साथ में यहां भी मुझे अपने शरीर की आवश्यकता का ध्यान रखना था.

कुछ दिनों बाद ही मेरे कंपनी के एक लड़के के साथ मेरा टांका भिड़ गया और उस लड़के के साथ मेरा रिश्ता फलने फूलने लगा.

दस साल तक कंपनी में काम करते रहने के बाद अब मेरे बेटे निखिल की उम्र जानने समझने की हो गई थी. उधर कंपनी वाले उस लड़के की शादी हो गई थी. जिसके बाद हमारे बीच कोई सम्पर्क नहीं रह गया था.
मेरे अन्दर भी अब सेक्स की भूख शांत हो चुकी थी.

निखिल 12 वीं तक की पढ़ाई पूरी करके अब कॉलेज जाने लगा था. मेरा लड़का अब जवान हो गया था. मेरी उम्र भी अब आगे बढ़ने लगी थी.

मगर कहते हैं न कि चढ़ती जवानी और दूसरा उतरती जवानी दोनों पर काबू रख पाना बहुत मुश्किल होती है.
मैं तो चढ़ती जवानी से निकल गयी थी … मगर 39 साल की उम्र में मैं जवानी की अंतिम अवस्था में पहुंच चुकी थी.

मेरे शरीर में एकाएक सेक्स की तीव्र इच्छा होने लगी थी. Hindi Vasna Kahani
मगर मैं इससे बच रही थी.

कारण था निखिल अब 19 साल का हो चुका था. अगर अब मैं कुछ गलत करती और ये बात किसी को पता चल जाती या निखिल को पता चल जाता तो आप समझ सकते हैं कि एक जवान बेटे पर क्या गुजरेगी.

मैं अपने आपको बहुत समझा बुझा कर रख रही थी. अपना ध्यान दूसरी तरफ बिजी रख रही थी.

मगर एक रात जब मैं सो रही थी. करीब रात 11 बजे मुझे बाजू वाले कमरे में जहां निखिल सोता था. वहां से अजीब-अजीब आवाजें सुनाई देने लगी थीं.

मुझे लगा निखिल कोई मूवी देख रहा होगा मगर जब बहुत देर तक किसी लड़की की हंसने की आवाजें आने लगीं, तो मैं चुपचाप उठ कर खिड़की से झांकने लगी.

अन्दर का नजारा देखकर मैं तो दंग रह गयी थी. अन्दर नेहा थी, ये निखिल के क्लास के ही लड़की थी. वो निखिल के साथ कई बार घर आ चुकी थी.

इस समय नेहा पूरी तरह नंगी थी और नीचे बैठ कर निखिल के लंड को चूस रही थी.
जब मेरी नज़र निखिल के तने लंड पर गई तो मेरा होश उड़ गया.

एकदम घोड़े जैसा लंबा और मोटा लंड. इतना मोटा और लंबा लंड दुनिया में हज़ारों में एक दो लोगों का ही होता होगा.

नेहा लंड का महज टोपा बस को मुँह में ले पा रही थी. Hindi Vasna Kahani

ये सब देख मेरे अन्दर अजीब सी लहर दौड़ गयी. देखते देखते ही उन दोनों की चुदायी चालू हो गई थी.
मैं बस चुपचाप दर्शक की तरह देख रही थी.

मेरा हाथ अब मेरी चुत में जा पहुंचा था. मेरी चुत गर्म हो गयी थी. उधर नेहा निखिल के लंड को ठीक से अन्दर भी नहीं ले पा रही थी … वो बहुत तकलीफ में थी.

मुझे ये सब देख बहुत जोश आ गया था. मगर मैं वहां जा भी नहीं सकती थी क्योंकि वो मेरा बेटा था.

करीब 40 मिनट की मैराथन चुदायी के बाद नेहा बिल्कुल मूर्छित सी पड़ गयी थी.
निखिल ने अपना पानी नेहा के बदन पर गिरा दिया था.

अब तक मेरी चुत भी दो बार पानी छोड़ चुकी थी.

मैं वापस बिस्तर में आ गई. उसी बीच मुझे समझ आ गया कि नेहा चुपके से निकल गयी.

सारी रात मुझे निखिल के घोड़े जैसा लंड दिमाग में घूमता रहा था. मेरे अन्दर कामवासना बढ़ गई थी.
फिर जैसे तैसे मुझे नींद आ गयी.

सुबह निखिल को देखा तो फिर से वही चित्र दिमाग में घूमने लगा. मगर मैं कुछ कर भी नहीं सकती थी.
मुझे सेक्स करने का बहुत इच्छा बढ़ गयी थी मगर मैं कहीं हाथ पांव भी नहीं मार सकती थी. Hindi Vasna Kahani

अब तो हर रात मैं वही नजारा देखती और खुद को उंगली से शांत कर लेती.

करीब 5 दिन तक मैंने लगातार नेहा और निखिल की चुदायी देखी. उसके बाद करीब 4-5 दिन नेहा नहीं आई थी.

उसी बीच मुझे जरूरी काम से गांव जाना था. मैंने निखिल से अपने गांव जाने की बात कही.

वो कॉलेज से आने के बाद गांव जाने की बात बोला. निखिल 4 बजे घर आया, तो हम दोनों शाम को 5:30 घर से निकले.

गांव शहर से 70 किलोमीटर दूर था. हम दोनों को एक दिन बाद वापस भी आना था. तो एक जोड़ी कपड़े लिए और घर से मोटरसाइकिल से निकल गए.

ठंडी का मौसम शुरू हो गया था. हम घर से निकले तभी हल्का अंधेरा छाने लगा था.

करीब हम 40 किलोमीटर पहुंच पाए थे कि अचानक ही काले बादल घिर आए और तेज़ बारिश शुरू हो गई. हम दोनों रास्ते में ऐसी जगह फंसे थे, जहां से सीधा हमारा गांव आता … बीच में और कोई गांव नहीं था.

बारिश तेज़ थी, इस कारण से हम भीग गए थे और बाइक भी धीरे चल पा रही थी. Hindi Vasna Kahani

मैंने निखिल को एक पेड़ के नीचे रुकने को बोला ताकि हम थोड़ी देर बारिश से बच जाएं. हम तो वैसे भी पूरी तरह भीग चुके थे.

तभी धीरे-धीरे बिजली चमकना भी शुरू हो गई थी. जब जब बिजली के चमकने से लाइट आती … निखिल और मैं पूरी तरह दिख जाते थे.
मेरी साड़ी मेरे शरीर में चिपक गयी थी. निखिल मेरे तरफ देख रहा था, जब रोशनी में मेरा नज़र उससे टकरातीं, तो वो नज़रें झुका लेता था.

मुझे अजीब लगने लगा था.
हम दोनों ने बिजली के कड़कने की हल्की आवाज़ सुन कर उस पेड़ से हटने का मन बनाया और गाड़ी पर बैठ कर निकल गए.

अभी हम दोनों दो किलोमीटर ही गए होंगे कि रास्ते में एक बंद ढाबा दिखा. हम वहां रुक गए … सोचा शायद इधर कोई होगा.

मगर जब वहां पहुंचे, तो देखा वहां कोई आदमी नहीं था.

अन्दर एक कमरा था, जहां एक छोटी सी चारपाई थी. हम दोनों वहां रुके, तो बारिश के पानी से भीगने से बच गए थे. मगर हम दोनों पूरी तरह भीग चुके थे. हमें ठंड भी लग रही थी.

मैं- निखिल तुम अपने गीले कपड़े निकाल दो … ठंड कम लगेगी. Hindi Vasna Kahani
निखिल- हां, मैं यहीं बाहर रह जाता हूं आप भी अन्दर कमरे में जाकर कपड़े सुखा लो … नहीं तो आपको ठंड लग जाएगी.

मैं अन्दर जाकर साड़ी निकाल कर वहां लगी एक खूंटी में टांग दी. बाहर निखिल भी अपनी शर्ट उतार कर सुखाने लगा था.

चारों तरफ घुप्प अंधेरा था. मैं ऐसी ही चारपाई में बैठी थी कि अचानक जोर से तेज़ बिजली के कड़कने से मेरे मुँह से चीख निकल गयी थी.
निखिल मेरी चीख सुन भागा-भागा अन्दर आया.

उसके नजदीक आते ही पहले से कहीं तेज़ एक बार फिर बिजली कड़की. मैं झट से निखिल को पकड़ कर उससे लिपट गयी.

मैंने उसे जोर से जकड़ लिया था. मेरे सीने के उभार उसके सीने से दब गए थे. मेरी सांसें उसकी छाती से टकराने लगी थीं.

वो नए खून के जवान लड़का था. एक स्त्री के गिरफ्त में आते ही उसके अन्दर हलचल शुरू हो गई थी.
निखिल ने भी मुझे अपने हाथों से जकड़ लिया था. मेरी पीठ का ज्यादातर हिस्सा खुला था.

मैं- मुझे बिजली से बहुत डर लग रहा है
निखिल- मैं हूँ न यहां … आप डरो नहीं.

तभी मुझे मेरे कमर के आस-पास कुछ उभार महसूस होने लगा था. Hindi Vasna Kahani
मैं समझ गई थी कि निखिल का तगड़ा लंड तन रहा है.

उसके बारे में सोच कर ही मेरे अन्दर एक अजीब कशमकश होने लगी थी. Hindi Vasna Kahani
मैं उसके सीने में सिर छुपाए उस उभार को महसूस करने लगी थी.

मैं- मुझे बहुत ठंड लग रही है.
निखिल- बस कुछ देर ऐसे ही दोनों लिपटे रहेंगे … तो ठंड कम हो जाएगी.
मैं- मुझे और जोर से जकड़ो निखिल … गर्मी मिलेगी.

फिर मुझे निखिल और जोर से अपने बांहों में कसने लगा. मेरा स्तन उसकी छाती से जोर से दब चुका था. उसके हाथ मेरी पीठ पर थे.

मेरे अन्दर चुदायी का नशा छाने लगा था. मैं भूल चुकी थी कि जिससे मैं लिपटी थी … वो मेरा सगा बेटा है.

मुझे अपनी कमर में जहां उभार महसूस हो रहा था, उस जगह को मैं हल्के हल्के से दाएं बांए करके कमर से रगड़ रही थी. आह कितनी गर्मी थी वहां.

निखिल को मेरी इस हरकत के बारे में पता लग गया था. वो अपनी कमर को मेरी तरफ जोर से चिपकाने की कोशिश करने लगा था. उसका हाथ मेरे पीठ में हल्का हल्का चलने लगा था.

मुझसे अब ये गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी; मैं बोली- निखिल हम दोनों ठंड से मर जाएंगे. अब हमें जिंदा रहने के लिए अपने अन्दर की गर्मी को एक-दूसरे के सहारे से सम्भालना पड़ेगा. Hindi Vasna Kahani

निखिल- हां.
मैं निखिल की हां सुनते ही अपना हाथ निखिल के लंड पर ले गई. मैं उसके लंड को सहलाने लगी.

मेरे ऐसे करते ही निखिल मेरे कंधे पर अपना सिर रख कर उस जगह को होंठों से चूमने लगा.

मैंने उसकी पैंट ढीली करके लंड बाहर निकाल लिया और हाथों से पकड़ लिया.

आह … गजब की लंबाई मोटाई थी. उसका खड़ा लंड मेरी पूरी मुट्ठी में नहीं समा रहा था.
आज मैं भी अपनी ढलती जवानी की ज्वाला को संभाल नहीं पा रही थी.

मेरे अन्दर इस वक़्त बस चुदायी की भूख जाग गई थी. सामने वाला लड़का जो भी हो, ये मुझे होश नहीं रह गया था.

दूसरी तरफ निखिल भी ना जाने कौन सी धुन में था कि बिना झिझक के वो मेरा साथ देने को आतुर हो चला था.
उसने मेरे पेट में अपना हाथ घुमाते हुए अपना हाथ वहां पहुंचा दिया, जहां से मुझे अपनी आग शांत करनी थी.

आज मैं अपनी चुत में अपने बेटे के हाथों का स्पर्श महसूस करने लगी थी.

मेरा बेटा अपनी उंगलियों से मेरी चुत को गजब तरीके से सहलाने लगा था. Hindi Vasna Kahani

तभी निखिल मुझे पलट दिया. अब मैं उसकी तरफ पीठ करके खड़ी थी. वो मेरे स्तनों को मसलने लगा था.

निखिल भी बहुत जोश में था. वो मेरे पेटीकोट को ऊपर करने लगा. पेटीकोट को कमर तक उठा कर मेरे कच्छे को नीचे खिसका दिया.
फिर मुझे घोड़ी के जैसे हल्का सा सामने को झुका कर उसने अपना तगड़ा लंड मेरी चुत में टिका दिया.

चुत में निखिल के लंड के स्पर्श से मेरा रोम-रोम झुनझुनाहट से भर गया था. आज खुद के बेटे का लंड मेरी चुत के अन्दर जाने वाला था.

निखिल ने मेरी चुत की दरार में लंड का टोपा फंसाया और अन्दर लंड उतारने लगा.
मेरी आह निकलने लगी थी.

निखिल ने धीरे-धीरे खिसकाते हुए अपने लंड को अन्दर तक पेल कर अपना कब्जा जमा लिया था. मुझे ऐसा लगने लगा था, जैसे निखिल का लंड मेरे सीने तक न आ जाए.

मैं जिंदगी में पहली बार इतने मोटे लंबे लंड से चुद रही थी, वो भी अपने बेटे के लंड से.

तो दोस्तो, ये हिंदी वासना कहानी का क्या असर होने वाला था; ये तो आपको मैं अगले भाग में लिखूंगी ही … मगर आप मां बेटे के बीच अनायास हुए इस सेक्स को किस नजरिये से देखते हैं.
प्लीज़ अपनी राय मेरी सेक्स कहानी के लिए जरूर दें. जिन्हें मां बेटे की चुदाई पसंद न आई हो, वो प्लीज़ ज्ञान पेल कर अपना और मेरा समय नष्ट न करें.

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