दर्द है, फिर भी चाह है-1 - Incestsexstories.in | Hindi antarvasna sex kahani दर्द है, फिर भी चाह है-1 - Incestsexstories.in | Hindi antarvasna sex kahani

दर्द है, फिर भी चाह है-1

दर्द है, फिर भी

दर्द है, फिर भी :> मैं रॉकी कुमार नौकरी की तलाश में हैदराबाद गया हुआ था, वहाँ मैं एक बॉयज़ हॉस्टल में रुका था अपने कुछ दोस्तों के साथ।

जहाँ यह हॉस्टल था वो जगह लड़कियों से हमेशा भरी रहती थी और मैं हमेशा सोचता रहता था कि मुझे कब कोई मिलेगी क्योंकि मेरे बाकी सब दोस्तों के पास एक एक थी, सिर्फ मैं ही था जिसके पास एक भी नहीं थी। दर्द है, फिर भी

अगले दिन मुझे अपने एच आर से मिलने जाना था, अपनी नौकरी के लिए। मैं अगले दिन वहाँ गया और उन्होंने मुझे बाहर रुकने को कहा।

मैं बाहर आधे घंटे तक रुका, फिर उन्होंने मुझे मेरा जोइनिंग लैटर दिया और मस्त वाली तनख्वाह भी, जो मैंने कभी सोचा नहीं था कि मुझे इतना मिलेगा।

उस दिन मैं बहुत खुश था, सोचा कमरे में जाकर दोस्तों को बताऊँगा। वहाँ जाकर देखा कि सब अपने काम में लगे हुए हैं, सबको अपनी वाली से मिलने जाना था।

सब कुछ देर के बाद चले गए। मैं क्या करता, निराश दिल को लेकर होटल के सामने वाले बार में चला गया। वैसे तो मैं पीता नहीं हूँ, फिर भी आपको सच बता देता हूँ कि मैं एक ग्लास से ज्यादा बीयर नहीं पी सकता, मुझे उतने में ही चढ़ जाती है। और उस दिन तो मैंने दो गिलास पी ली थी, मुझसे चला नहीं जा रहा था, फिर भी मैं कैसे न कैसे कर के बार के बाहर तक आ ही गया। चलना मुश्किल था मगर मैं अपने पूरे होश में था।

बाहर निकलते ही मुझे मेरे दोस्त मिल गए, उन्होंने मुझे बाइक पर बिठाया और अच्छे से कमरे में ले गए।

दूसरे दिन सुबह मैं उठा तो देखा कि मेरा वालेट मेरे पास नहीं है। बहुत दुख हुआ मुझे, उसमें पैसे तो ज्यादा नहीं थे मगर मेरे काम के चीजें जैसे पैन कार्ड, ड्राईविंग लाइसेंस, ये सब खो गए। दर्द है, फिर भी

इसी के चलते सोच सोच कर मैं काम पर चला गया और वहाँ अपने लोगों के साथ आराम से काम करने लगा।

फिर दोपहर के समय मुझे किसी लड़की का कॉल आया कि उसे मेरा वालेट मिला है और उसमें मेरे बारे में जानकारी थी, इसीलिए वो मुझे कॉल कर पाई है।

मैंने फोन पर ही उसका शुक्रिया अदा किया और कहा- मैं आपको शाम को जरुर मिलूँगा।

वो भी मान गई। शाम को जब मैं उससे मिला मैं तो उसे देख कर पागल सा हो गया।वो ऐसी लड़की थी जिसमें सब कुछ था, उसकी अदा, उसकी फिगर, क्या थी यार, देख कर मज़ा आ गया।

मैंने फिर बहुत हिम्मत कर के उसका फोन नम्बर लिया और फिर धीरे धीरे उसे मैसेज करने लगा, और वो भी मुझे करने लगी। इसी तरह काफी दिनों तक चला और हम अब अच्छे दोस्त बन गए।

एक दिन सुबह उसका मैसेज आया, उसने मुझे उस दिन दिन अपने घर पर बुलाया था ऐसे ही खाने पर। दर्द है, फिर भी

मैं भी उसके बुलाने से पागल हो गया था, मैं सोचने लगा कि आज मैं यह करूँगा, वो करूँगा वगैरा-वगैरा।

मगर जब उसके घर पहुँचा तब पता चला कि उसका जन्मदिन था।

फिर उसके घर में पार्टी हुई, उसके बाद मैंने उसे कहा- अब मैं जा रहा हूँ, देर बहुत हो गई है।

उसने मुझे रोका कि अभी मत जाऊँ। उसकी इस बात को सुन कर फिर से मेरे दिल में घंटी बजी।

उसने मुझे फिर किसी से मिलाया और फिर आलतू फालतू बातें हुई।

दूसरे दिन मैं सुबह उठा और अपना मोबाइल लेकर बाहर सिगरेट पीने को निकला तो मैंने मोबाइल में देखा, उसका मैसेज था कि मैं उसे तुरंत फोन करूँ, कुछ जरूरी काम है।

मैंने उसे उसी वक्त फोन किया वो बोली- जल्दी से घर आओ, कुछ काम है।

मैंने उस वक्त कुछ सोचा नहीं और उसके घर चला गया। उसके घर पहुँचने के बाद मैंने उसे हाय कहा और देखा कि उसके हाथ में बीयर की बोतल थी।

वो बोली- शायद तुम पीते नहीं !

मैंने कहा- कौन बोला कि मैं नहीं पीता।फिर हम दोनों छत पर गए और एक-एक गिलास बीयर पी दर्द है, फिर भी

मैं धीरे धीरे अपने से बाहर होने लगा, तो मैंने सोचा कि समय क्यों बर्बाद करना, मैंने उसके होंठ पर अपनी उंगली रख दी और कहा- तुम्हारे होंठ सही में काफी रसीले हैं और मजेदार भी !और कहते कहते मैं उसके वक्ष को ताकने लगा पर कहा- माफ करना अगर तुम्हें बुरा लगा तो।

वो कुछ देर चुप रही, फिर बोली- मुझे पता है कल रात जब तुम मुझसे बात कर रहे थे, तब तुम अपना हिला रहे थे। उसकी यह बात सुन कर मेरा मुँह बंद हो गया और मैं कुछ भी न बोल पाया।

वो उठी, मुझे बोली- मेरे पीछे पीछे नीचे चलो।

जब वो नीचे की तरफ जा रही थी तब वो पीछे मुड़ी और दरवाजा बंद करने लगी।जब वो दरवाज़ा बंद कर रही थी, उसका चेहरा मेरे सामने था और मैं उसकी गरम साँसें एकदम से महसूस कर रहा था और उसकी उभरी हुई छाती को भी।मैंने कोई मौका छोड़े बिना उसे चूम लिया उसके होंठों पर, तो वो झट से पीछे हटी और फिर भाग कर आगे निकल गई।

मैं भी उसका पीछा करने लगा, उस दिन उसके घर कोई नहीं था।

वो भागते हुए रसोई में चली गई और फिर हमने वहाँ थोड़ी मस्ती की। दर्द है, फिर भी

उसने फ्रिज का दरवाजा खोला और पानी निकलने लगी तो मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया, मेरा हाथ उसके पेट पर था और मैं उसके नाभि से खेलने लगा और उसकी गर्दन पर उसे चूमने लगा।

वो अपने सर को ऊपर नीचे करने लगी मगर उसने मुझे रोका नहीं। फिर मैंने अपने हाथ उसके चूचों पर रख दिए, दबाया नहीं, बस हल्के से रखा।फिर मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया और फिर उसके सर को मैंने अपने दोनों हाथों से पकड़ा और उसके नीचे के होंठ को मैंने चूमा, फिर ऊपर के होंठ को मैं चूसने लगा।

कुछ देर में वो भी मेरा साथ देने लगी और वो भी मेरे होंठों को चूमने लगी। हम एक दूसरे को करीब दस मिनट तक चूमते रहे और वो दस मिनट मुझे लग रहा था कि मैं आसमान में उड़ रहा हूँ। मैंने उसके बालों को खोल दिया।

मैं अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता था इसीलिए मैंने उसे वहीं जमीन पर लिटा दिया और उसकी नाभि को चूमने लगा।

मैंने उसकी टीशर्ट को हल्का सा ऊपर किया तो वो अपने आप को रोक नहीं पाई और मुझे पकड़ कर चूमने लगी पागलों की तरह।

मैंने फिर उसके पेट पर हाथ फेरना शुरू कर दिया जिससे वो और ही उत्तेजित होती चली जा रही थी। अब मैं उसके गुलाबी निप्पल को देखे बिना नहीं रह पा रहा था। दर्द है, फिर भी

अब मैंने उसके टीशर्ट को पूरा ऊपर उठा दिया, मुझे उसकी चूचियाँ थोड़ी थोड़ी दिखने लगी। दर्द है, फिर भी

मैंने उसके एक चूचे को अपने एक मुँह में भर लिया और हल्के हल्के काटने लगा। दर्द है, फिर भी

कहानी जारी है, देखे अगले भाग में…

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