पड़ोसी दीदी कि चुदाई - Hindi Sex story - Incest Sex Stories - Antarvasna पड़ोसी दीदी कि चुदाई - Hindi Sex story - Incest Sex Stories - Antarvasna

पड़ोसी दीदी कि चुदाई – Hindi Sex story

पड़ोसी दीदी कि चुदाई – Hindi Sex story:- आज से 5 साल पहले मैंने अभी तक चूत का मजा नहीं चखा था हा एकबार होली के समय मै अपने बड़े भाई के ससुराल गया था वहा मेरी सेटिंग उनकी शाली से हो गया वो एकदम टाइट माल थी उसे पटाया लेकिन बात सिर्फ चुम्मा चाटी तक ही सीमित रह गई चूत की मजा नहीं के पाया या तो अपनी पारिवारिक डर या नादानी की वजह जो कम उम्र के मित्र है समझ सकते है खैर छोड़िए आते हैं अभी की कहानी पर,

मै पहली बार अपने परिवार से दूर गया था वहा पर बड़े से क्वाटर में सिर्फ भैया और मै रहता था जाते हि कुछ दिन तक तो मै कुछ समझ नहीं पाया लेकिन दो दिन के बाद एक लड़की बराबर आके हमदोनो खाना रखके चली जाती मै उसपे डोरे डालने चाहा लेकिन घर में एक रखे ग्रीटिंग कार्ड से पता चला कि वो भैया की माल है वो तीन बहन थी ये सबसे बड़ी वाली उसके बाद दो थे एक का तो मुहल्ले के लड़के से चक्कर था तो वो भी खूब भाव खाती थी और उसके बाद छोटी वाली उससे मै सेटिंग कर लिया लेकिन वो अभी खाने लायक नहीं तो चूस के रह जाता ये सब इसलिए बता रहा हूं ताकि आप कहानी को अच्छी से समझ पाए उसका क्वार्टर मेरे जस्ट सामने था नीचे में

अब बात करते जिसकी मै चूत मारी उन सबकी मां जिसका नाम रीना है 35 के आसपास इतने उम्र होने के वावजूद एक गठीले बदन कि मालकिन जिसका साइज 34-30-36 के लगभग अब आप सब समझ गए होने की ऐसा माल देखने के बाद किसका लंड खड़ा नहीं होगा उसका क्वार्टर अपने बाप के घर के पास ही था हम सब उसे दीदी कहते थे सुरु के दिनों में मेरा उसके प्रति सम्मान था लेकिन जब मै उसके पति को देखा कि खूब दारू पी के मारपीट करता है और पूरी तरह से अपने शरीर को बर्बाद कर चुका था अब कोल फील्ड में था तो दारू पीना आम बात थी उनलोग के घर में टीवी नहीं था तो वो सब बराबर हमलोग के क्वार्टर में टीवी देखने आ जाता और एक रिश्ता भी उसके घर से था डर से वो लोग भैया को कुछ नहीं बोलते थे सब जानते हुए जिसका फायदा मुझे मिला मै धीरे धीरे दीदी के नजदीक जाने लगा जैसे वहा पर सोमवार को सब्जी बाज़ार लगता था।

वहा पर जाना एटीएम से पेमेंट निकालने जाना तो मै उनसे काफी घुलमिल गया लेकिन बात अभी वहा तक नहीं पहुंचा जब वो लड़ाई करती तो उन्हें छुड़ाने के चक्कर में थोड़ा धर पकड़ कर वो थोड़ा इस बात को केयर करने लगी थी लेकिन वो अभी अपने तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी उसका पति भाई बहन के रिश्ता समझ कर कभी शक नहीं करता था, दोस्तों आम कहानी में जो पढ़ता हूं चूत उतनी भी आसानी से नहीं मिल जाती है हा लेकिन उतना कठिन भी नहीं सही दिशा में कदम रखा जाए तो गंतव्य जरूर मिलता है यही हुआ मेरे साथ मै पूरे अपने तरीके से चूत के चक्कर में लगा था हुआ एक दिन ऐसा की मेरे घर जो दूसरे तल्ले पर था कॉलोनी में झगड़ा हो रहा था और वो मेरे और उसकी छोटी बेटी मेरे घर में टीवी देख रही अचानक वो उठकर झगड़ा देखने लगी कमरे में उस समय हम तीन लोग ही थे तो अचानक मै उठा और उसके पीछे लग के मै भी कॉलोनी में झाकने लगा और मेरा लन्ड उसके गांड़ के दरार में रगड़ मारने लगा गांड़ में लंड सटते ही पूरी तरह से सख्त हो गया जिसे उसने पूरी तरह भाप लिया था।

उस समय मेरा कोई गलत इरादा नहीं था उसने मुझे इशारा कर दिया और मुझसे चुदने के लिए राजी हो गई फिर हम बैठ कर बाते करने लगे उस समय उसका पति नीचे घर पर ही था फिर उसने भावुक होते हुए अपनी पूरी कहानी सुनाई की उसका पति मतलब मेरे जीजाजी उसे लंड का सुख तनिक भी नहीं देते और समाज की डर से कहीं वो कोशिश भी नहीं की वो बोली की मेरे भैया पे चांस मारने की कोशिश की लेकिन वो सब उससे बहुत डरते थे तो उससे मेरे चोदने बात पक्की हो गई कि एक दिन बात उसका पति का नाइट शिफ्ट है 8बजे से वो बोली कि रात को मै गेट खुला रखूंगी तुम आ जाना मै भैया के साथ सोता था तो उस रात में दुसरे वाले रूम में सो गया मुझे नींद नहीं आ रही थी मैं बस इंतजार कर रहा था दो बजने का जो मैंने उसे समय दिया था उस समय सभी उसके घर में गांड़ फाड़ के सो रहे थे उसके घर एक रूम खाली रहता है ज्यादातर वो लोग हॉल में सोते थे।

मेरे क्वार्टर का सीढ़ी सीधे रोड पे था तो मै उतरा और दोनों तरफ देख के जल्दी से उसके घर में घुस गया दरवाजा का कुण्डी खुला था मेरे पैर डर से काप रहे थे जाते है वो उठ गई मै और उसके रूम में घुस उसकी बेटी लोग सब सो रही मुझे उस समय बहुत ही ज्यादा डर लग रहा था मै रूम में जाते है उसे पकड़ के होठं की पंखुड़ियों को चूसने लगा उसके शरीर में आग लगी हुई थी और उसे हल्का शर्म भी आ रहा था सभी औरत को यही लगता मै ना ना भी करती रहूं सामने वाले से चुदा भी लू मै उसे कपड़े खोलने के लिए बोला वो नहीं मानी तो मै उपर से उसे चूचे को दबाने लगा वो भी पूरी सिसकारी लेने लगी फिर मै उसके ब्लाउस के बटन को खोल दिया वो ब्रा नहीं पहनी थी सायद आज ही मै भी अपना शर्ट खोल दिया मेरे जिस्म उसके जिस्म से सटते ही मुझे गजब का आनंद मिलने लगा मेरे लन्ड पूरी तरहलोहे का सरिया बन चुका था मैंने उसे पीछे घूमने को बोला और उसके पीछे जाके उसके गर्दन पे चूमना सुरु कर जिससे वो पूरी चुदासी वाला आवाज निकालने लगी मुझे हल्का डर भी लग रहा था दीदी को भी मेरे जिस्म की गर्मी बहुत अच्छी लग रही वो

मेरे जिस्म से पूरी तरह आगे से चिपक गई और मेरे पीठ पर नाखून गड़ाने लगी अब मेरे लन्ड को रोक पाना मुश्किल था तो मैंने पहले उसके पेटीकोट को ऊपर करना चाहा लेकिन फिर लगा कि मजा नहीं आयेगा तो मैंने कुछ न सोचते हुए उसके साड़ी के बाद उसका पेटीकोट का नाड़ा खोल के नीचे सरका दिया अब मेरे सामने थी दुनिया की नायाब चीज जिसके लिए मनुष्य किसी भी हद तक चल जाता एक प्यारी सी फूली हुई चूत जिसे होटों की पंखुड़ियों कुछ नाइट बल्ब मै हल्के दिख रहे थे मैंने झट से बिना कुछ सोचे हुए उसमें अपना मुंह लगा दिया वो बोले लगी ये क्या कर रहे हों तुम वहा पर कोई मुंह लगाने की जगह है तो मै समझ गया या तो खेल रही है या इसके पति ने कभी चूत नहीं चुसा मै पूरे मस्ती उसकी चुत को चूसने लगा उसके मुंह से मादक सिसकाियां निकालने लगी अब वो खुद मेरे सर को अपनी चुत पर अपनी दोनों हाथो से दबाने लगी मै भी जोर जोर से उसके चुत के फाको में जीव चलाने लगा फिर थोड़ी ही देर में उसने मेरे मुंह पर पानी छोड़ के निढाल है गई उनकी चुत गीली होते ही मेरा भी हालत खराब होते जा रहा था दीदी बार बार कहने लगी अब और मुझे मत तड़पाओ बहुत दिनों से लंड की गरमी प्यासी हूं जल्दी से चोद दो उसके मैंने मैंने अपनी पैंट उतार कर उसके हाथ से मेरा लन्ड सहलाने को बोला वो शरमाते हुए मेरे लन्ड पर हाथ लगा के सहलाने लगी तेरा लंड बहुत ही मस्त है कई दिनों के बाद ये नसीब हो रहा है मैंने उसे भी चूसने को बोला तो ना ना करने लगी मुझे गुस्सा आ गया लेकिन थोड़ी देर में गई फिर चूसने अब पता नहीं वो जीवन मै पहली बार चूस रही था बहुत लेकिन चूसी बहुत अच्छा फिर अपने मुंह से मेरा लंड निकाल दी जल्दी से चोदने को बोलने लगी मै थोड़ी सी उसकी क्ची मसलने के बाद बोला रुक आज तेरा गर्मी शांत कर देता हूं।

मैंने उसकी होठ पर होठ रखे नीचे से उसका थूक से सना हुआ लंड उसकी चुत पे रख के धीरे से पेल दिया उसकी हल्की सी चीख निकली लेकिन वो पूरे लंदन गड़प गई मैं धीरे धीरे से अपना लन्ड चुत से अंदर बाहर करने लगा उसकी सिकारियां बढ़ने लगी मैंने उसके होठों पर अपने होठ रखकर धकापेल चुदाई करने लगा मै थोड़ी ही देर में जन्नत में पहुंच गया और उसके चुत मै ही झड़ गया मुझे बहुत शर्म आने लगी तो वो बोली पहली बार में भी तुम ठीक ठीक किया फिर वो लंड को मुह में लेके चूसने लगी मुझे कुछ भी मजा नहीं आ रहा था लेकिन फिर धीरे धीरे मेरा लन्ड पहले जैसा ही कड़क होने लगा अब बारी था दूसरे राउंड का तो वोली अब दूसरे तरीके से वो मेरे कमर पर बैठ गई काफी भारी थी लेकिन चुत के सामने सब हलका लगता हैं उसने मेरे लन्ड को पकड़ के अपने चुत में गटक लिया।

अब मै नीचे से झटके दे रहा था दीदी गांड़ उछला के चुदवारही थी थोड़ी देर चुदाई के बाद मुझे घोड़ी पोज मारने का मन करने लगा मै बहुत सारे पोर्न मै देखा था तो सोचा आज ट्राय कर लेता हूं मैंने दीदी को घोड़ी बनने को बोला तो झट से पीछे मुड़ के घोड़ी बन गई उसकी गोरी बड़ी गांड़ इतना मस्त लग रहा था मै बता नहीं सकता फिर मैंने पीछे से चुत पर लंड टिका कर के मारा तो गजब मजा आया मेरा लन्ड घिसने लगा उसके चुत कुछ टाईट लगने लगा मै धाकपेल छुड़ाई में लगा हुआ था उसके दोनों गोल मटोल जोर गांड़ मेरे जांघ पे तबले जैसे थाप से रहे थे लगभग दस मिनट तक मै उसे लगातार चोदते रहा मै फुल स्पीड से उसकी चुदाई कर रहा था फिर थोड़ी ही देर में मेरे लन्ड की सारी गर्मी उसके चुत में गिरते ही उसके चुत मेरे वीर्य से लबालब भर गई अब दीदी की चुत की खुजली तो कुछ हद तक मिट ही गई सुबह के चार बजने वाले थे मुझे डर भी लग रहा था कहीं कोई उठ न जाए फिर मै दबे पाव अपने क्वार्टर मै आके सो गया उस रात मैंने दीदी को दो बार जमके चोदा था जिसमें उसकी चुत की प्यास बूझ गई उसके बाद वो मेरी सरकारी माल बन गई हम सबके सामने कभी भी ऐसा व्यवहार नहीं जिससे किसी को भी हमपे सक हो मै उसे जब भी मौका उसकी चुत और गांड़ की बाजा बजा देता वो कंडोम से बहुत नफरत करती है एक दिन उसे कंडोम लगा के चोदने लगा तो छीन के फेक दी बोली मुझे तो सिर्फ तुम चोदते हो और मुझे बच्चा नहीं होने का ऑपरेशन भी है दोस्तो बिना कंडोम के चुत मारने का मजा ही अलग है लेकिन सतर्क रहे सुरक्षित रही आज भी मै उसे जब वहा जाता हूं तो पेलता हूं अब उसकी छोटी बेटी को भी चोदता ही उसकी कहानी बाद में दोस्तो जहा भी मौका मिले सोच समझ के चुत मर लीजिए भगवान हर मौका बार बार नहीं देते।

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