डाकू ने मेरी रंडी माँ को चोदा-1 - Incestsexstories.in | Hindi antarvasna sex kahani डाकू ने मेरी रंडी माँ को चोदा-1 - Incestsexstories.in | Hindi antarvasna sex kahani

डाकू ने मेरी रंडी माँ को चोदा-1

डाकू ने मेरी रंडी :> हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम उमेश है, यह स्टोरी मेरी माँ और एक डाकू के बीच की है. अब में आपको मेरी माँ के बारे में बता देता हूँ. यह 12 साल पहले की बात है, जब मेरी माँ की उम्र 35 साल थी और उनका फिगर साईज 34-29-36 है, उनके बूब्स बहुत शेप्ड है और कूल्हें बहुत ही गोल और टाईट और बड़े-बड़े है, उनका कलर फेयर है और उनकी हाईट 5 फुट 8 इंच है और वो दिखने में बहुत सुन्दर है. अब में आपको ज्यादा बोर ना करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ. मेरे पापा का निधन बहुत समय पहले हो गया था और अब घर में मेरी माँ और में ही था. डाकू ने मेरी रंडी

फिर एक बार हमें मेरी छुट्टियों में बिलासपुर जो मध्यप्रदेश स्टेट के एक मंदिर में जाना था, तो हम दोपहर को कोलकाता से बाइ ट्रेन निकले. अब बिलासपुर स्टेशन आने ही वाला था, वो ट्रेन बिलासपुर नहीं जाती थी, तो हमें उस ट्रेन से बिलासपुर से पहले ही उतरना पड़ा. अब हमें बिलासपुर तक जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिल रहा था और शाम के 5 बजे थे. डाकू ने मेरी रंडी

अब हम स्टेशन के वेटिंग रूम में बैठकर इंतजार कर रहे थे, मेरे साथ बहुत सारा सामान था. अब धीरे-धीरे अँधेरा होने लगा, तो हमने सोचा कि धीरे-धीरे पैदल ही रोड़ से चलते है तो हमें कोई साधन दिख जाए. फिर हमें उस रोड़ पर दो लोग दिखाई दिए, तो माँ ने उनसे पूछा कि भाई साहब ये रास्ता कहाँ जाता है? तो उन्होंने पूछा कि क्या आप लोग यहाँ पर नये है? तो माँ ने कहा कि हाँ. डाकू ने मेरी रंडी

फिर उन्होंने पूछा कि आपको कहाँ जाना है? तो माँ ने कहा कि बिलासपुर. फिर उन्होंने कहा कि बिलासपुर तो नजदीक ही है, आप लोग आइए हम छोड़ देते है. फिर में अपना सामान लेकर आया और उनके साथ चलने लगा. अब चलते-चलते हमें उनके नाम पता चला, उनमें से एक का नाम भूधिया और दूसरे का समर सिंह था. डाकू ने मेरी रंडी

माँ ने भी बताया कि उनका नाम सीमा और मेरा नाम उमेश है. फिर कुछ दूर चलने के बाद हम एक ऐसी जगह पहुँचे, जहाँ पर तीन चार तंबू और एक कुटिया बनी हुई थी. फिर माँ ने पूछा कि ये हम कहाँ आ गये है? तो उन लोगों ने कहा कि ये डाकू कतार सिंह का डेरा है और तुम लोगों को यहाँ पर सरदार से मिलकर ही जाना पड़ेगा. फिर वो दोनों हमें कतार सिंह से मिलने के लिए लेकर गये. फिर हम एक कुटिया के अंदर गये तो हमने देखा कि एक करीब 6 फुट का बहुत ही हट्टा कट्टा सांड जैसा आदमी बैठा था. डाकू ने मेरी रंडी

एक आदमी ने अपने उस सरदार को बताया कि हम लोग कहाँ मिले है? और कहाँ जाना चाहते है? तो कतार सिंह ने माँ से बोला कि सीमा तुम्हें यहाँ पर 1-2 दिन रहना पड़ेगा. फिर माँ ने पूछा कि क्यों? तो उसने बोला कि हमारी मर्ज़ी. अब माँ उसको देखकर डर गयी थी और उन सबके पास बंदूक भी थी, तो माँ धीरे से बोली कि ठीक है.

फिर उसके बाद उन लोगों ने हमें एक तंबू में ले जाकर छोड़ दिया और बोले कि ये तुम लोगों का तंबू है, तब करीब शाम के 7 बज रहे थे. फिर रात को खाना खाने के बाद हम सो गये, तो तभी एक आया और माँ को जगाया और बोला कि सरदार बुला रहे है, जब माँ साड़ी पहने हुए थी. फिर माँ अपनी साड़ी ठीक करते हुए बोली कि क्यों? तो उसने बोला कि पता नहीं सरदार गुस्से में है, तो माँ बहुत डर गयी. अब मैंने भी डर के मारे अपनी आखें बंद कर रखी थी. अब माँ उठकर उसके साथ चली गयी और बाहर बहुत अंधेरा था. फिर वो माँ को कतार सिंह की कुटिया की तरफ लेकर गया, तो में भी पीछे-पीछे चुपके से चल दिया, उस कुटिया के अंदर एक लालटेन जल रहा था. फिर जब मैंने खिड़की के छेद से अंदर देखा तो मुझे कुटिया के अंदर पूरा दिख रहा था. डाकू ने मेरी रंडी

माँ अंदर घुसी और दूर ही खड़ी हो गयी. अब कतार सिंह एक लुंगी पहनकर नंगा बदन बैठा था. फिर उसने माँ को उनके नाम से पुकारा और बोला कि आओ सीमा बैठो और बेड की तरफ इशारा किया. फिर माँ ने पूछा कि क्यों? तो उसने कहा कि आओं तुम बहुत थक गयी हो, अब थोड़ा ऐश करो. अब माँ ना-ना करने लगी, तो उसने बोला कि अगर तू यहाँ पर नहीं आई तो तेरी तो जान जाएगी ही साथ में तेरा बेटा भी मरेगा, तो ये सुनकर माँ रोने लगी.

फिर वो उठकर माँ के पास आया और माँ को पीछे से हल्के से पकड़ लिया. फिर माँ उसको मना करने लगी कि ये ठीक नहीं है, मेरे एक बड़ा बेटा है, भगवान के लिए मुझे छोड़ दो. फिर उसने कहा कि अरे छोड़ तो देंगे ही, पहले तेरे मज़े तो ले लेने दे रानी और ये बोलकर वो पीछे से माँ की चूचियाँ दबाने लगा, उसका हाथ बहुत ही सख्त था. अब माँ दर्द के मारे सिहरने लगी थी. फिर माँ ने थोड़ा सा विरोध किया तो उसने सामने आकर माँ को एक जोरदार थप्पड़ मारा तो माँ घूम गयी. डाकू ने मेरी रंडी

उसने माँ के कपड़े खोल दिए और माँ के ब्लाउज को फाड़ दिया और उनका पेटीकोट भी फाड़कर फेंक दिया. अब माँ नंगे बदन खड़ी होकर रोने लगी थी. फिर उसने अपनी लुंगी निकाली तो एक 10 इंच का काला सा लंड बिल्कुल खड़ा हुआ दिखा, तो माँ और डर गयी.

फिर उसने माँ के बाल पकड़कर बिस्तर पर बैठाया और माँ के मुँह पर अपने लंड को रगड़ने लगा. अब माँ अपना मुँह नहीं खोल रही, तो उसने माँ को और दो थप्पड़ मारे और फिर उसने माँ का मुँह खोलकर उसमें अपना लंड जितना जा सकता था उतना डालकर माँ के मुँह को चोदने लगा. फिर थोड़ी देर में उसने माँ को लेटा दिया और माँ की चूत में अपनी उंगली घुसाने लगा. डाकू ने मेरी रंडी

अब माँ रो भी रही थी, लेकिन अब धीरे-धीरे उनका रोना बंद हो गया था और वो ओह करके सिसकियाँ भरने लगी थी. अब ये सुनकर उसने कहा कि साली रंडी तेरी चूत को मस्ती चढ़ने लगी है, रुक जा तुझे में आज दुबारा माँ बना दूँगा. फिर वो माँ के ऊपर उनकी जांघों पर बैठ गया और अपने लंड को माँ की चूत में घुसाने लगा. तब माँ चिल्लाने लगी, आआआआआआआआआआअ करके और बोलने लगी कि नहीं में इतना बड़ा नहीं ले पाऊँगी, लेकिन वो सांड था और जबरदस्ती सांड की तरह माँ को पेलने लगा था, जैसे कोई हाथी हो. डाकू ने मेरी रंडी

अब माँ उसके सामने बिल्कुल कमजोर पड़ गयी थी, अब माँ चुपचाप सब सह रही थी. अब थोड़ी देर के बाद माँ को भी मज़ा आने लगा था और अब वो भी अपनी कमर थोड़ी ऊपर करके उससे चुदवा रही थी. फिर करीब आधे घंटे तक जबरदस्त सांड की तरह पेलने के बाद वो शांत हो गया. अब में समझ गया कि माँ की चूत में उसका बीज गिर गया है. डाकू ने मेरी रंडी

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