डाकू ने मेरी रंडी माँ को चोदा-2 - Incestsexstories.in | Hindi antarvasna sex kahani डाकू ने मेरी रंडी माँ को चोदा-2 - Incestsexstories.in | Hindi antarvasna sex kahani

डाकू ने मेरी रंडी माँ को चोदा-2

Daku Ne Meri Randi Maa Ko Choda-2

डाकू ने मेरी रंडी :> माँ डर डर के उससे बोलने लगी कि में अगर प्रेग्नेंट हो गयी तो? तो उसने कहा कि उसने शादी नहीं की और अगर तू माँ बन गयी, तो वो बच्चा मुझे चाहिए, तू उसे मेरे पास छोड़कर जाएगी और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो तेरे शहर में जाकर तेरे और तेरे पूरे खानदान को मार डालूँगा, तो माँ चुप हो गयी. फिर 5 मिनट के बाद माँ उठने लगी, तो उसने कहा कि अरे कहाँ जा रही है रानी? अभी पूरी रात बाकी है. फिर माँ ने पूछा कि अब क्या करूँ में? आपने तो मुझे फिर से माँ बना दिया होगा, अब और क्या चाहिए? तो ये सुनकर उसने माँ को अपनी बाँहों में भींच लिया और पकड़कर लेट गया और धीरे-धीरे उनको सहलाने लगा. डाकू ने मेरी रंडी

फिर माँ थोड़ी देर में म्‍म्म्मममममममममममममममम करके मीठी सी आवाज निकालने लगी. अब वो अपने बड़े से सख्त हाथों से माँ के गोरे-गोर चूतड़ों को मसलने लगा था और माँ उूउउम्म्म्मममम करने लगी. डाकू ने मेरी रंडी

वो माँ के बूब्स दबाने लगा और कहने लगा कि तू मेरी बीवी बनेगी और में तुझे जिंदगी भर ऐसे ही चोदूंगा और फिर वो माँ के मुँह को चूसने लगा और अपने हाथों से माँ के पूरे बदन को मसलने लगा. अब थोड़ी देर में माँ की भी हालत खराब हो गयी थी. फिर माँ उससे बोली कि अब मुझसे नहीं सहा जाता कतार, अब मुझे छोड़ दो. फिर ये सुनकर वो और जोश में आ गया, तो उसने माँ को कमर से पकड़कर उल्टा लेटा दिया और खुद भी माँ के ऊपर लेट गया और माँ के कूल्हों के बीच में से अपना लंड माँ की चूत में डालने लगा. डाकू ने मेरी रंडी

अब माँ पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी तो माँ ने भी अपने दोनों पैर फैला दिए और उसे अपना लंड डालने में मदद की. अब वो धीरे- धीरे चालू हो गया और माँ उूउउहह, उउउफफफफफफफफफफफफ्फ आवाज़ के साथ मजे ले रही थी. अब वो पीछे से माँ के दोनों बूब्स कसकर दबा रहा था और सांड की तरह उनकी चूत में अपना लंड पेल रहा था.

इस बार वो करीब 1 घंटे तक माँ को पेलता रहा, अब माँ इस बीच में 5 बार झड़ गयी थी. फिर उसने इस बार भी अपना पूरा बीज माँ की चूत में गिराया और 1 घंटे बाद शांत हो गया. तब उसने माँ से पूछा कि कैसा लगा तुझे मेरा लंड रानी? तो माँ बोली कि जैसे में कुँवारी थी और आज मेरी सुहागरात हुई है. अब ये सुनकर वो बहुत खुश हो गया और माँ को अपनी बाँहों में भरकर माँ की चूची पर अपना सर रखकर सो गया और माँ भी बेशर्म की तरह उसके बालों को सहलाने लगी और फिर थोड़ी देर में वो दोनों सो गये और में फिर में अपने तंबू में आकर अकेला ही सो गया.

फिर सुबह करीब 9 बजे मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि माँ मेरे पास बैठी थी, तो मैंने पूछा कि क्या हुआ माँ? तो उन्होंने कहा कि कुछ नहीं. फिर दोपहर को वो माँ को घूमने लेकर गया, तो में भी उनके साथ चल पड़ा, तो उसने बेटा-बेटा करके मुझे बहुत प्यार किया. फिर थोड़ी देर में हम लोग एक झरने के पास आकर पहुँचे.

उसने मुझसे कहा कि जाओ बेटा चारो तरफ घूमकर देखो, यहाँ कोई डर नहीं है. फिर मुझे समझ में आया कि इन दोनों को अकेले में रहना है, तो में घूमने चला गया और थोड़ी दूर में एक पेड़ के पीछे से देखने लगा. फिर उसने पहले अपने कपड़े खोले और माँ से कहा कि चलो नहाते है. फिर माँ ने कहा कि नहीं उमेश आ जाएगा.

उसने कहा कि नहीं आएगा, वो बच्चा है. फिर माँ ने मना करने की बहुत कोशिश की, तो उसने माँ को अपनी बाँहों में खींच लिया और उनके हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया और बोला कि चाहिए नहीं क्या? तो माँ उनकी तरफ देखते हुए उसका लंड सहलाने लगी और उसने माँ की साड़ी उतार दी.

फिर उसने माँ का ब्लाउज और पेटीकोट भी उतार दिया तो मैंने देखा कि माँ अंदर कुछ नहीं पहने हुए है. फिर वो माँ को पानी में लेकर गया और माँ को पत्थर के ऊपर सुलाकर माँ की चूत को चाटने लगा और बोला कि तेरी चूत सीमा कितनी मीठी है? अब माँ ने अपनी आँखे बंद कर ली थी. फिर वो माँ के ऊपर लेटकर बड़े प्यार से माँ को पेलने लगा. डाकू ने मेरी रंडी

अब माँ को उसका बड़ा सांड जैसा लंड बहुत प्यारा लगने लगा था. अब माँ ने उसको पकड़ लिया था और उसको चूमने लगी थी. अब वो भी माँ के निप्पल को काटने और चूसने लगा था. फिर माँ उससे कहने लगी कि और ज़ोर से चोदो मुझे, म्‍म्म्मममममम, मुझे मार डालो तुम, तुमने इतना बड़ा लंड कहाँ रखा था? तो उसने कहा कि तेरे लिए संभालकर रखा था रानी और फिर उसके बाद उसने माँ से कहा कि मुझे तेरी गांड का छेद दिखा. फिर माँ ने कहा कि नहीं कतार बहुत छोटा छेद है, तू उसे छोड़ दे.

फिर उसने कहा कि डर मत रानी एक ना एक दिन तो मुझे तेरी कुँवारी गांड को भी फाड़ना है, चल अब दिखा और ये कहकर उसने माँ को उल्टा करके माँ के चूतड़ों को अपने हाथ से फाड़कर माँ की गांड का छेद देखने लगा और बोला कि हाए क्या प्यारा छेद है? ये तो मुझे फाड़ना ही पड़ेगा. फिर माँ डर गयी और बोली कि तुम्हारा 10 इंच लंड उसमें नहीं जाएगा.

वो हँसने लगा और माँ की गांड के छेद पर अपनी जीभ रखकर चाटने लगा, अब माँ सिहरने लगी थी. फिर थोड़ी देर के बाद उसने चाटना बंद किया और बोला कि चल इसको में बाद में फाड़ दूंगा, पहले तेरे बेटे को ढूंढते है. फिर उसके बाद उन दोनों ने अपने-अपने कपड़े पहने और मुझे आवाज दी, तो में थोड़ी देर में आ गया. फिर उस दिन शाम को हम लोग मंदिर दर्शन करने गये, तो मंदिर में माँ मुझसे बोली कि तुझे कतार अंकल से डर तो नहीं लगता ना? तो मैंने बोला कि हाँ लगता है. तो उन्होंने कहा कि क्यों? वो तेरे पापा जैसे है, उनसे मत डर, तो में समझ गया कि उनका इरादा क्या है?

अब उस दिन रात को 9 बजे हमारी वापस आने की ट्रेन थी. अब दोपहर के 3 बजे करीब वो माँ को फिर से अपनी कुटिया में बुलाकर 2 घंटे तक बारी-बारी में चोदता रहा और हर बार माँ की चूत को अपनी बीज से भर दिया. अब माँ की गर्दन पर उसके पंजे की निशान आ गये थे. अब माँ की गोरी गांड को उसने थप्पड़ मार-मारकर और मसल-मसलकर लाल कर दिया था.

अब माँ बहुत थक गयी थी और वापस अपने तंबू में आकर सो गयी. फिर रात को 7 बज़े उसने खुद हम लोगों को स्टेशन पर छोड़ दिया और हमारा पता ले लिया और फिर हम घर चले आए. अब माँ बहुत खुश नजर आ रही थी, अब पापा जाने के बाद पहली बार माँ बहुत खुश थी. फिर उसके 1 महीने के बाद माँ ने एक दिन पूछा कि तुझे एक भाई या बहन होती तो कैसा लगेगा? तो मैंने कहा कि बहुत अच्छा लगेगा, तो माँ कुछ नहीं बोली.

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